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पटना मेट्रो प्रोजेक्ट में बड़ी प्रगति, मोइनुल हक अंडरग्राउंड स्टेशन लगभग तैयार

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पटना मेट्रो प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोइनुल हक स्टेडियम के पास पहला अंडरग्राउंड स्टेशन लगभग तैयार है और टनलिंग का काम युद्धस्तर पर जारी है। न्यू बाइपास एलिवेटेड रूट भी फिनिशिंग स्टेज में पहुंच चुका है।

पटना/आलम की खबर:पटना में बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतरती हुई नजर आ रही है। शहर के यातायात ढांचे को बदल देने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना में सबसे बड़ी प्रगति मोइनुल हक स्टेडियम के पास बने पहले अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन को लेकर देखने को मिल रही है, जो अब लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है। करीब 22 मीटर की गहराई में तैयार यह स्टेशन न केवल इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, बल्कि यह पटना मेट्रो के भविष्य की मजबूत नींव भी साबित हो रहा है। यहां सिविल वर्क लगभग पूरा कर लिया गया है और अब टनलिंग का काम तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मोइनुल हक अंडरग्राउंड स्टेशन को पटना मेट्रो प्रोजेक्ट के सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक माना जा रहा है। निर्माण एजेंसियों के अनुसार, इस स्टेशन को आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के अनुसार विकसित किया गया है ताकि भविष्य में यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। स्टेशन की गहराई और डिजाइन इसे विशेष बनाते हैं, क्योंकि यह सीधे शहर के व्यस्त इलाके को भूमिगत नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगा।

टनल बोरिंग मशीन (TBM) अब राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे से गुजरते हुए लगातार खुदाई कर रही है। यह वही क्षेत्र है जहां काम सबसे अधिक संवेदनशील और जटिल माना जा रहा है। रेलवे टर्मिनल के नीचे टनल निर्माण एक बड़ी तकनीकी चुनौती है, जिस पर विशेषज्ञों की 24 घंटे नजर बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार दो टीबीएम मशीनें अलग-अलग लेनों में काम कर रही हैं। पहली लेन में लगभग 705 मीटर के लक्ष्य में से 278 मीटर खुदाई पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरी लेन में 681 मीटर में से 448 मीटर तक काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

इस तेजी से चल रहे निर्माण कार्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले महीनों में पटना के भूमिगत नक्शे में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मोइनुल हक स्टेडियम से लेकर पटना जंक्शन तक लगभग छह किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसे अगले तीन से चार महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नेटवर्क पटना के सबसे व्यस्त हिस्सों को जोड़कर यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दूसरी ओर, पटना मेट्रो का एलिवेटेड कॉरिडोर भी तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुका है। न्यू बाइपास क्षेत्र में खेमनीचक से मीठापुर तक एलिवेटेड ट्रैक का ढांचा लगभग तैयार हो चुका है। यहां अब केवल ट्रैक बिछाने और बिजली से संबंधित वायरिंग का कार्य बाकी रह गया है। यह हिस्सा शहर के उन इलाकों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है जहां रोजाना भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस रूट के शुरू होने से जगनपुरा, रामकृष्णा नगर और मीठापुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी। यहां रहने वाले लोगों को अब लंबी ट्रैफिक जाम की समस्या से छुटकारा मिल सकेगा और आवागमन पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगा। मीठापुर के बाद मेट्रो फिर से अंडरग्राउंड मार्ग पर प्रवेश करेगी, जिससे शहर के केंद्रीय हिस्सों को सीधा और तेज कनेक्शन मिलेगा।

हालांकि पटना मेट्रो के संचालन को लेकर सबसे बड़ी बाधा अभी सुरक्षा मंजूरी और तकनीकी औपचारिकताओं की है। भूतनाथ से मलाही पकड़ी के बीच का सेक्शन लगभग तैयार है, लेकिन फायर एनओसी और सीएमआरएस जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी प्रक्रियाएं इस महीने के अंत तक पूरी कर ली जाएंगी, जिसके बाद ट्रायल और उद्घाटन की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

प्रारंभिक चरण में खेमनीचक स्टेशन को इंटरजंक्शन कार्यों के चलते शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे शुरुआती संचालन सीधे भूतनाथ से मलाही पकड़ी के बीच किया जाएगा। यह कदम प्रोजेक्ट को तेजी से शुरू करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, पटना मेट्रो परियोजना अब उस चरण में पहुंच चुकी है जहां निर्माण कार्य तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है और शहर के लोगों को जल्द ही आधुनिक मेट्रो सुविधा का वास्तविक लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह परियोजना न केवल पटना की यातायात व्यवस्था को बदल देगी, बल्कि शहर की विकास गति को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।

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